मेरे जीवन की पहली बारिश
आसमान से अंगारे बरसा रही थी ….
बादलो की गर्जना सुन…
तुमसे बाहर निकलने को आतुर,
मैं तुममे ही धंसी जा रही थी ।

हाथो में बूंदो को पकड़ने …
और आँखों में सूरज सोखने वाले सपने,
फाइटर जेटो की आँधियो में …
उड़कर अमेरिका चले गए ।

माँ मुझे तुम अपनी दुनिया में ले चलो ….

यहाँ मानवाधिकार शब्द के पीछे,
कितने चेहरे नंगे हो चुके है….
यहाँ हत्या अब लोगो की रूचि नहीं ,
आदत बन चुकी है।

अश्वस्थामा के ब्रम्हास्त्र से लेकर…
नाइट्रोजन बम तक ,
सबके अंत में लिखा होता है तुम्हारा नाम ,
हर क्षण वे तुम्हारी तलाश में है।

माँ सभी हथियार तुम्हारी कोख के दुश्मन क्यों है ?

~Nitesh Kumar Patel

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